छुट भईया नेता या समाजसेवी कैसे बने?

डॉ.धीरज फुलमती सिंह

व्यंग

मुबंई: छुट भईया नेता और समाज सेवक इंसानो की यह वह नश्ल है,जो हर गली,नुक्कड,चौराहे पर आपको आसानी से घूमती नजर आ जाएगी। कभी किसी चाय की टपरी पर तो कभी पान की बखाड पर झक्क सस्ते सफ़ेद कुर्ते मे खडे हुए नजर आ जाता है। ये शहर मे भी मिलते हैं और गांव में भी पाए जाते हैं। ये हर जगह उपलब्ध होते हैं।

The perks Indian political class enjoys includes a house, on the ...

छुट भईये नेताओ और समाज सेवकों की जमात में शामिल होना है तो अपने चेले-चपाटों को जमा करें। चेले चपाटे कहां से मिलेंगे, इस बात के लिए निश्चित रहे,भारत मे बहुत बेकारी और बेरोजगारी है, आसानी से मिल जाएगे।फिर किसी सस्ते,सुंदर, टिकाऊ से दलाल तमीज की भाषा मे जिसे “सलाहकार- कंस्लटेंट” कहते हैं,को पकड कर सबसे पहले एक सामाजिक संस्था बना लें।

खुद उस संस्था का अध्यक्ष बन जाए, अपनी पत्नी या पति,भाई को सचीव बना लें। उसके कुछ कार्ड छपवा लिजिए, जिस पर आप का तकल्लुफ राष्ट्रीय अध्यक्ष लिखा हो,अब भले ही आपको पड़ोसी जानता न हो, भाव न देता हो वैसे भी कोई पड़ोसी किसी को भाव देते कहा है?

इस बात की जरा सी भी चिंता न करें,लेकिन हर जगह अपने को राष्ट्रीय अध्यक्ष जताने की कोशिश मे लगे रहे। चेले चपाटो को हडकाए रहें,उनमे भौकाल बनाए रहे। सभी राष्ट्रीय अध्यक्ष यही करते हैं। निश्चित रहे, आप भी कोई अलग और अजूबा नही कर रहे हैं। भले ही आप की सामाजिक संस्था मे कुल मिलाकर वही गिनती के दो चार सदस्य हो,कोई और न हो लेकिन विजिटिंग कार्ड पर हमेशा अपने नाम के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष लिखवाए, ऐसा करने से भौकाल अच्छा बनता है।

किसी प्रिटींग प्रेस वाले को धर कर समय समय पर अपने ही पैसे से अपना फोटो लगा बैनर बनवा लिया करें, पैसे कम पडे तो अपने चेलों चपाटों को उनका भी फोटो चस्पां करने का लालच देकर कॉट्रिब्यूशन मे पैसे इकट्ठा करें। हींग लगे न फिटकरी और रंग भी चोखा। लो बन गये, लोकल लिडर। उसके बाद समय बे समय बडी-बडी हस्तियों से अच्छे और वयक्तिगत संबंध होने का गुणगान करते हैं।

उनके साथ होने का कुछ काल्पनिक कहानियाँ गढ ले, अब भले ही हकीकत में वे आपको अपने दरबान से भी ज्यादा हिराकत भरी नजरों से देखें लेकिन बेफिक्र होकर अपना गुणगान करते हैं क्यो कि गहराई में जाकर सच्चाई पता करने की फुर्सत किसे होती है? सामने वाले शख्सियत को भी अपना भौकाल बनाए रखने के लिए भी भीड की जरूर होती है,ऐसे मे आप की इज्जत बनते हुए बच जाती है।

अपने जन्म दिन पर एक सौ- देढ सौ रूपये का गुलदस्ता और साथ मे सत्तर अस्सी रूपये का एक शाल खरीद ले। कई बार कुछ मूर्ख किसीम के लोग आपकी नजरों में चढने के लिए खुद ही सौ पचास का गुलदस्ता भेट करने लग जाते हैं। ऐसे लोग हर समाज में मिल जाते हैं, ईश्वर बहुत दयालु है, उसने ऐसे बहुत से लोगो को बनाया है। फिर चार-आठ लोगो से लेंते-देते फोटो खिंचवाने और उसी को अपने फेसबुक और वाट्सअप समूह में बांट दे, भेज दें। फिर अपने चेले चमचों से अपनी तारीफ के पुलिंदे बंधवा ले। फिर देखिएगा देश की बडी बडी हस्तियां भी आपके आगे पानी भरते नजर आएंगे। ये चेले चमचे समां बांधने मे बडे माहिर होते हैं।

बडे-बडे नेताओं के साथ हमेशा फोटो खिचते- खिंचवाते रहे। नेता आपको जानता हो या नही,फिकर नॉट लेकिन सोशल मीडिया पर उनके जन्म दिन की शुभेच्छा देते रहे,ऐसा करने से आस पास के लोगो और इलाके में रुतबा बढता है।

जैसे ही कोई चुनाव नजदीक आए,लोगो को कहना शुरु कर दिजिए कि आप चुनाव लड़ने के जरा भी इच्छुक नही है,अब भले ही अंदर से चुनाव लड़ने की इच्छा जोर मार रही हो, ऐसा कहने से लोगो मे जिज्ञासा पैदा होती है फिर धीरे से,पीछे से अपने चमचों को सोशल मीडिया पर अपनी मुनादी करवाने के लिए कहिए कि आप भावी विधायक, पार्षद है। आपकी अपनी बात भी रह जाएगी और बेइज्जती भी नही होगी । भले ही चुनाव के वक्त कोई पार्टी आपको घास भी न डालें लेकिन तब तक इलाके में भौकाल तो बन ही जाता है।

साल मे एकाध बार लिट्टी चोखा, फाफडा जलेबी की पार्टी जरूर दे,ज्यादा क़रीबी लोगों को मटन मछली की खैरात एक बार दे दे। इसमे पैसे ज्यादा खर्च नही होते लेकिन भौकाल बहुत बनता है। एक बात और स्थानिय नकली पत्रकारों को पकड कर रखें,इनकी कीमत ज्यादा नही होती है, ये दो-ढाई सौ रुपये मे हमेशा बिकने को तैयार रहते हैं, ऐसे बहुत से तथाकथित नकली पत्रकार आपको अपने इलाके में आसानी से मिल जाएगे।

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पुलिस स्टेशनों,सरकारी दफ्तरों मे अपने आस पास के लोगो का काम करवाते रहें,लोग आप से खुश रहेंगे मगर पीछे से अपना कमीशन लेना न भूलें। आखिर समाज सेवकी और नेतागिरी भी तो चमकानी है, बिना कमीशन के पैसो के काम कैसे चलेगा भला ? अगर काम नहीं भी कर सके तो कोई बात नहीं है, बस बंदर की तरह इधर उधर उछलते कूदते रहे ताकि लोगो को लगे कि आप काम करने की कोशिश मे लगे हैं जैसे वो दिल्ली का मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हमेशा करते रहता है। बस बिलकुल वैसे ही एक्टिग करते रहना है।

और हाँ, काम हो या ना हो, फोटो खिंचवाना न भूले। ये फोटो सोशल मीडिया पर हमेशा चेंपते रहें। ऐसे फोटो आपका भौकाल बनाने मे हमेशा काम आते हैं।….लो जी आप तो समाज सेवा मे नेता बन गये। कितना आसान है ना,छुट भईया समाज सेवक और नेता बनना?

जय हिंद

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