कमजोर नीतियों का परिणाम देश को आज झेलना पड़ रहा

विशाल

नई दिल्ली: देश आज चीन के साथ जिन समस्याओं से संघर्ष कर रहा है। उन समस्याओं के बहुत से कारण हो सकते है। लेकिन अगर हम भूतकाल में जाकर इस बात पर चिंतन मनन करें तो इसके पीछे सबसे बड़ा जो कारण दिखता है वह पहला कारण है वामपंथ और दूसरा नेहरू जी की कमजोर नीतियां जिसका परिणाम देश को आज झेलना पड़ रहा है।

1962 के युद्ध के बाद चीन से मिली पराजय के बाद 26 जनवरी 1963 को दिल्ली के रामलीला मैदान में गणतंत्र दिवस समारोह आयोजित हुआ समारोह में जब लता मंगेशकर ने कवि प्रदीप द्वारा रचित गीत ए मेरे वतन के लोगों गाया था तो वहां उपस्थित सभी लोगों की आंखों में आंसू आ गए और सभी लोग रो पड़े लेकिन उसी समय भारत के पराजय का जश्न भारत के वामपंथी नेता दिल्ली से लेकर कोलकाता तक मना रहे थे।

जिस समय पूरा देश पराजय के कारण शोक में था। भारत के वीर सपूतों की चिताओं की अग्नि अभी बुझी नहीं थी। उस समय कोलकाता में चीन के जीत पर जाम पर जाम छलक रहा था। वामपंथियों का कहना था कि यह युद्ध नहीं बल्कि यह एक समाजवादी तथा पूंजीवादी राज्य के बीच एक संघर्ष है।

उस समय कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम में बंगाल के सबसे ज्यादा समय तक मुख्यमंत्री रहे ज्योति बसु ने तब चीन का समर्थन करते हुए कहा था कि चीन कभी हमलावर हो ही नहीं सकता (china can not be the aggresson) सभी वामपंथियों का गिरोह इस युद्ध का कारण तत्कालीन भारत सरकार के नेतृत्व की कट्टरता और उत्तेजना के माथे मढ़ दिया युद्ध के समय भारतीय सेना को जब रक्त की जरूरत पड़ी तब पूरे देश प्रेमी खून दे रहे थे लेकिन वामपंथियों ने अपने सभी कार्यकर्ताओं को मना कर दिया कि कोई खून नहीं देगा यह वामपंथी भले ही आज मुख्यधारा में शामिल होने का नाटक करते हैं।

राजनीतिक दल बनकर लोकसभा का चुनाव लड़ना भारत के संविधान को मानना और भारत भक्त बनने के दावे करना, आज के समय में यह जल जंगल-जमीन की लड़ाई के नाम पर भारत के प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा जमाने और भारत की लोकतांत्रिक ढांचे को खत्म करने का लगातार षड्यंत्र रच रहे हैं। भारत विरोधी सारे संगठन के गिरोह के तार इन्हीं लोगों से जुड़े हैं। भारत की संस्कृति सभ्यता को मिटाने का पूरा प्रयास करते हैं और भारत नाम के देश का अस्तित्व मिटाने का इनकी पूरी मनसा है।

मानव अधिकारों की लड़ाई लड़ने का ढोंग रचने वाले भारतीय वामपंथी आज भी नक्सलियों और माओवादियों के द्वारा जब निर्दोष लोग मारे जाते हैं। तब इनके मुंह से एक शब्द सुनाई नहीं पड़ता जब चीन अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा करता है तब भी यह चुप ही रहते हैं आज चीन तानाशाही के माध्यम से विश्व की महाशक्ति बनने का अपना सपना पूरा करने का हर संभव प्रयास कर रहा है।

दूसरा कारण चीन समस्या का वह है नेहरू वाद नेहरू जी पूर्ण रूप से विदेशी विचारधारा से प्रभावित तथा वामपंथियों के प्रभाव में थे जबकि वामपंथी ने हर समय नेहरु जी का अहित ही सोचा जब नेहरू जी देश के प्रधानमंत्री बने तो वामपंथियों ने कई बार नेहरु की सरकार को उखाड़ फेंकने का प्रयास किया पहले सोवियत तानाशाह एस्टेलिन ने भारत की आजादी को मान्यता न देने की घोषणा, उसे ब्रिटिश अमेरिकी साम्राज्यवाद का उपनिवेश करार दिया। फिर नेहरू द्वारा सोवियत संघ में नियुक्त राजदूत विजया लक्ष्मी पंडित को उनके पूरे कार्यकाल में मिलने का समय ना देकर भारत का अपमान किया विजयलक्ष्मी पंडित न केवल पंडित नेहरू की लाडली बहन थी बल्कि भारत की राजदूत भी थी।

यह जानते हुए भी एस्टेलिन ने भारत के साथ अपमान जनक व्यवहार किया इसके बाद भी नेहरू के वामपंथी प्यार में कोई अंतर नहीं आया जो कम्युनिस्ट चीन आज भारत को आंख दिखा रहा है। उसको संयुक्त राष्ट्र संघ में जगह दिलाने के लिए भारतीय प्रधानमंत्री पंडित नेहरू जी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लॉबिंग की नेहरू जी के बारे में ऐसी बहुत सी घटना है। जिससे सिद्ध होता है कि नेहरू जी का पूरा झुकाव बाम पंथ की तरफ था अगर आज हम देखते हैं तो पाते हैं कि चीन की सेना के साथ हमारी सेनाओं का जोरदार संघर्ष हो रहा है भारतीय सेना चीन की सेना के हालत पस्त कर दिए हैं। भारत के 20 जवान शहीद होकर चीन के 43 सेना को मारा लेकिन भारत के कुछ नेता जो नेहरू विचार तथा वामपंथ से पूरा प्रभावित हैं।

वे लोग भारतीय सेना का मनोबल कैसे कम किया जा सकता है। इस पर विचार कर रहे हैं तथा उनकी जितनी भी राजनीतिक टिप्पणियां आती है वे सभी चीन के पक्ष में ही आती है एक नेता ने तो जवानों को शहीद हो गए यह कहने के बजाय यह कहते हैं कि भारत के 20 जवान मारे दिए गए इनको शहीद होना और मारे जाने में अंतर नहीं समझ में आता कुछ लोग सेना का मनोबल गिराने के लिए कहते हैं। कि चीन ने हमारी इतनी जमीन पर कब्जा कर लिया इनको 1962 का युद्ध याद नहीं आता है। भारत में जितने वामपंथी हैं तथा नेहरू विचार के वाहक हैं वह सभी खाते तो भारत की हैं लेकिन इनका मन और दिल शत्रु देश के साथ होता है।

(लेखक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला प्रचारक गाजियाबाद है और यह लेखक के अपने स्वतंत्र विचार है।)

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